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राहुल की हरकतें देखकर आती है शर्म : अमित शाह

बिरला को पद से हटाने वाला अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से खारिज

लोकसभा में बुधवार को स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने वाला अविश्वास प्रस्ताव ध्वनिमत से खारिज हो गया। गृह मंत्री अमित शाह ने 56 मिनट तक प्रस्ताव पर सरकार की तरफ से जवाब दिया। इस दौरान उन्होंने राहुल गांधी और कांग्रेस पर जमकर हमला बोला।

शाह ने कहा कि 18वीं लोकसभा में कांग्रेस सांसदों को बोलने के लिए भाजपा से दो गुना ज्यादा समय मिला। फिर भी विपक्ष के नेता कहते हैं कि हमें बोलने नहीं दिया जाता। जब बोलने का मौका आता है तो वे जर्मनी में होते हैं, इंग्लैंड में होते हैं।

शाह ने कहा- एक तो वे बोलना नहीं चाहते हैं। जब बोलना चाहते हैं तो नियम के अनुसार नहीं बोलना चाहते हैं। ये सदन नियम से चलेगा। स्पीकर को नियमों के उल्लघंन पर रोकने और टोकने का अधिकार है। ये सदन मेला नहीं है, जो नियम से नहीं चलेंगे, उसका माइक बंद ही होगा।

गृह मंत्री ने आगे कहा- राहुल सदन में PM मोदी से आकर गले लग जाते हैं। आंख मारते हैं। फ्लाइंग किस देते हैं। मुझे तो बोलने में भी शर्म आती है। ये स्पीकर के आचरण पर सवाल करते हैं। अपने आचरण पर भी तो सवाल करिए। शाह के जवाब के दौरान विपक्ष ने जमकर हंगामा किया और ‘अमित शाह माफी मांगो’ के नारे लगाए।

शाह ने गिनाया, कांग्रेस- राहुल को सदन में कितना समय मिला

  • कितना बोलना है इसके लिए कुछ नियम बने हैं। 17वीं लोकसभा कांग्रेस को 157 घंटे 55 मिनट का समय दिया गया। जबकि उनके 52 सदस्य थे। कांग्रेस को भाजपा से 6 गुना ज्यादा समय दिया गया। जबकि भाजपा के पास 6 गुना ज्यादा सदस्य थे
  • 18वीं लोकसभा में भी कांग्रेस को भाजपा से दो गुना समय मिला। नेता प्रतिपक्ष कहते हैं कि हमें बोलने नहीं दिया जाता। मगर बोलने का मौका आता है तो जर्मनी में होते हैं इंग्लैंड में होते हैं। फिर शिकायत करते हैं।
  • 18वीं लोकसभा में 157 घंटे 55 मिनट कांग्रस के सदस्य बोले। मैं विपक्ष नेता से पूछना चाहता हूं कि आप तब क्यों नहीं बोले। किसने रोका था। वो तो आपका अधिकार है कि आपकी पार्टी से कौन बोलेगा।
  • विपक्ष के नेता स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव पर भी कुछ नहीं बोलते। फिर प्रस्ताव लाते क्यों है। एक तो बोलना नहीं चाहते हैं। बोलना चाहते हैं तो नियम अनुसार नहीं बोलना चाहते।
  • वक्फ संशोधन–धारा 370 जैसी चर्चाओं से राहुल गायब रहे। SIR पर चर्चा थी। विपक्ष के नेता को बोला गया कि आप बोलिए। नहीं बोले। उन्होंने सदन डिस्टर्ब किया। उनको अचानक एक आइडिया आया कि मेरी प्रेस कॉन्फ्रेंस पर चर्चा हो। आपके परनाना से लेकर आपकी दादी से पिता जी तक, बड़े बड़े नेता के प्रेस कॉन्फ्रेंस पर बहस नहीं हुई।
  • 16वीं लोकसभा में राहुल गांधी ने 2014, 2015, 2017 और 2018 में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव में भाग नहीं लिया। उन्होंने 16वीं लोकसभा में केंद्रीय बजट पर किसी भी चर्चा में भी हिस्सा नहीं लिया।
  • उन्होंने किसी भी सरकारी विधेयक पर चर्चा में भाग नहीं लिया। 16वें, 17वें, 19वें, 20वें और 21वें सत्रों में उन्होंने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा में भाग नहीं लिया। 19वें, 20वें, 22वें और 23वें सत्रों में उन्होंने केंद्रीय बजट पर चर्चा में भाग नहीं लिया और एक विधेयक को छोड़कर किसी अन्य विधायी चर्चा में भी भाग नहीं लिया। 18वीं लोकसभा में उन्होंने केंद्रीय बजट पर चर्चा में भाग नहीं लिया।

ट्रेड डील से किसानों को नुकसान नहीं, शाह की 3 बड़ी बातें

  • AI समिट में कांग्रेस के प्रदर्शन पर: शाह ने कहा कि दिल्ली में AI समिट हुआ। 80 देशों की बड़ी कंपनियां आईं। 20 से ज्यादा देशों के राष्ट्राध्यक्ष आए और कांग्रेस के लोग वहां कपड़े उतारकर वहां प्रदर्शन करने लगे। वे कहते हैं कि ये उनका अधिकार है। जबकि दिल्ली में प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर बनाया गया है। कांग्रेस भाजपा का विरोध करते-करते भारत का विरोध करने लगी है।
  • अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर: शाह ने कहा कि कांग्रेस आरोप लगा रही है कि अमेरिका के साथ ट्रेड डील में भारतीय किसानों का नुकसान हुआ है। मैं कहना चाहता हूं कि एक भी डील में नहीं भारत के किसान का नुकसान हुआ है। किसानों का नुकसान 2013 में कांग्रेस ने किया था।
  • नरवणे की किताब को लेकर विवाद पर: शाह ने कहा कि कांग्रेस चीन के साथ सीमा विवाद पर चर्चा करना चाहती थी। वो एक किताब के रेफरेंस से चर्चा करना चाहती थी, जो प्रकाशित नहीं हुई। इसलिए चर्चा करने की इजाजत नहीं दी गई। मैं कांग्रेस से पूछना चाहता हूं कि अक्साई चीन का 38 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र किसके समय में हड़पा गया। कांग्रेस पार्टी के समय में हड़प लिा गया। तब PM नेहरू ने विपक्ष को जवाब दिया कि वहां घास का एक तिनका भी नहीं उगता। ये तो उनकी मानसिकता है।

बिरला ने प्रस्ताव के निपटारे तक सदन नहीं जाने का फैसला लिया था

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला अविश्वास प्रस्ताव के बाद से लोकसभा की कार्यवाही की अध्यक्षता में शामिल नहीं हुए। करीब 119 विपक्षी सांसदों ने आरोप लगाया कि स्पीकर सदन चलाते समय पक्षपात कर रहे हैं और विपक्ष को बोलने का पर्याप्त मौका नहीं दिया जा रहा।

प्रस्ताव लंबित रहने के दौरान ओम बिरला ने संसदीय परंपरा का हवाला देते हुए नैतिक आधार पर कार्यवाही की अध्यक्षता न करने का फैसला लिया। इस दौरान सदन की कार्यवाही पैनल ऑफ चेयरपर्सन के सदस्य चलाते रहे। अब प्रस्ताव खारिज होने के बाद बिरला सदन की कार्वयाही की फिर से अध्यक्षता कर सकते हैं।

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