हरियाणा

डिफाल्टरों को नहीं मिलेगी जोमाटो, स्विगी व मेड की सुविधा

गुरुग्राम की एक सोसायटी ने बकाया वसूली की निकाला अजब तरीका

गुरुग्राम,

गुरुग्राम की एक प्रीमियम टाउनशिप में जिन निवासियों ने मेंटेनेंस शुल्क का भुगतान नहीं किया है, उन्हें जल्द ही रोजमर्रा की सुविधाओं से वंचित होना पड़ सकता है। जोमाटो और स्विगी जैसे ऐप से आने वाली फूड डिलीवरी, कार धुलाई और यहां तक कि घरेलू सहायिकाओं (मेड) की सेवाएं भी तब तक निलंबित की जा सकती हैं, जब तक बकाया भुगतान नहीं कर दिया जाता। यह चेतावनी गुरुग्राम के उप्पल साउथेंड टाउनशिप में चल रही एक असामान्य सार्वजनिक कार्रवाई का हिस्सा है, जहां मुख्य गेट के बाहर मोटे काले अक्षरों में लिखे बड़े पीले बोर्ड पर उन निवासियों के नाम लगाए गए हैं, जिन्होंने मेंटेनेंस शुल्क नहीं चुकाया है। इस टाउनशिप में फ्लैट और बिल्डर फ्लोर की कीमत कम से कम 2 करोड़ रुपये है। यह बोर्ड केवल डिफॉल्टरों के नाम ही नहीं बताता, बल्कि उसके परिणाम भी स्पष्ट करता है।

2009 से लंबित है भुगतान

नोटिस में लिखा है, ‘कृपया ध्यान दें कि आज से सभी गैर-जरूरी सेवाएं जिनमें मेड सेवाएं, कार वॉशिंग और जोमाटो तथा स्विगी जैसी डिलीवरी सेवाएं शामिल हैं, तब तक निलंबित रहेंगी जब तक पूरा बकाया अदा नहीं कर दिया जाता। जिन निवासियों के भुगतान लंबित हैं और जिनके नाम नोटिस बोर्ड पर प्रदर्शित हैं, उनसे अनुरोध है कि वे जल्द से जल्द अपना बकाया जमा करें।’ नोटिस में यह भी कहा गया है कि आरडब्ल्यूए के सामाजिक कार्यक्रमों में डिफॉल्टर और पीजी में रहने वाले लोग शामिल नहीं हो सकेंगे। कुछ निवासियों के बकाया कई साल पुराने हैं। कुछ मामलों में भुगतान 2012 से और यहां तक कि 2009 से लंबित है, जहां बकाया राशि 1 लाख रुपये से भी अधिक हो चुकी है। इस कदम ने टाउनशिप के भीतर तेजी से चर्चा का विषय बना लिया है। कुछ निवासी गेट पर रुककर नामों की सूची पढ़ते हैं, जबकि कुछ लोग गाड़ी से गुजरते हुए ही बोर्ड पर नजर डाल लेते हैं।

पहले भी की थी ऐसे ही वसूली

एक निवासी ने बोर्ड देखते हुए कहा, इतने लोगों ने पैसा नहीं दिया है। यह अच्छा है, शायद अब वे भुगतान करना शुरू करेंगे। रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के अनुसार, यह तरीका पहले भी काम कर चुका है। आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष कर्नल सुरेंद्र कुमार यादव ने कहा कि हमने 2023 में भी ऐसा ही बोर्ड लगाया था और लाखों रुपये का बकाया वसूल किया था। इस बार भी काफी बकाया जमा हो गया था। कोई इसका विरोध नहीं कर रहा है। हम निवासियों को भुगतान करने के लिए समझा रहे हैं। हमने डिलीवरी और मेड जैसी सेवाएं जारी रखी हैं क्योंकि कई कर्मचारी कई घरों में काम करते हैं। लंबे समय से यहां रहने वाले अनिल रस्तोगी ने कहा कि टाउनशिप के संचालन के लिए यह शुल्क जरूरी है।

आसान नहीं है प्रतिबंधों को लागू करना

उन्होंने कहा, हमारी टाउनशिप कई सुविधाओं के लिए नगर निकायों पर निर्भर है, इसलिए मेंटेनेंस शुल्क जरूरी है। कुछ लोगों ने लंबे समय से भुगतान नहीं किया था, जिससे परेशानी हो रही थी, लेकिन अब वे धीरे-धीरे समझेंगे। हालांकि, आरडब्ल्यूए के एक पूर्व सदस्य का मानना है कि मौजूदा तरीका काफी सख्त है। पूर्व आरडब्ल्यूए अध्यक्ष और अधिवक्ता राजेश खटाना ने कहा, हमारे समय में हम लंबित बिलों के लिए साप्ताहिक रिमाइंडर भेजते थे, हर महीने बैठक करते थे और शिकायत निवारण सत्र भी आयोजित करते थे। अब बिना ठीक से याद दिलाए और सूचित किए, लोगों के नाम सार्वजनिक किए जा रहे हैं। हालांकि टाउनशिप के मुख्य गेट पर मौजूद सुरक्षा गार्डों का कहना है कि इन प्रतिबंधों को सख्ती से लागू करना शायद संभव नहीं होगा। एक गार्ड ने कहा, बोर्ड कुछ भी कह सकता है, लेकिन हम लोगों को भूखा तो नहीं रख सकते, है ना?

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