
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि आज प्रदेश की जनता देख रही है जिस प्रकार कांग्रेस के विधायक सदन में झूठ बोलकर सदन से वॉक आउट कर जाते हैं, यही कांग्रेस की फितरत रही है कि आरोप लगाओ और भाग जाओ। उन्होंने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि जो अपने आप को नहीं संभाल सकते वो घर को क्या संभालेंगे। हम पर झूठे आरोप लगाकर वह भाग जाते हैं। विपक्ष का यह रवैया दुर्भाग्यपूर्ण है।
मुख्यमंत्री मंगलवार को विधानसभा के बजट सत्र के दौरान बजट अनुमान 2026—27 पर चर्चा के उपरांत जवाब दे रहे थे। कांग्रेस के वॉकआउट करने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्षी सदस्य पता नहीं किस चश्मे से बजट को देख रहे हैं। विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं है। केवल अखबारों की सुर्खियों में बने रहने के लिए बजट पर निराधार टिप्पणियां कर रहे हैं। विपक्ष ने बजट को गंभीरता से नहीं पढ़ा उन्हें यही नहीं पता कि बजट में विकास के लिए क्या-क्या प्रावधान किए गए हैं तो वे प्रदेश की समस्याओं पर कैसे चर्चा कर सकते थे। जो सड़क पर आरोप लगाते हैं, उन्हीं आरोपों को सदन में बोल देते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा के 2 करोड़ 80 लाख लोग इस महान सदन की तरफ आशा भरी नजर से देखते हैं, परंतु विपक्ष का यह गैरजिम्मेदाराना रवैया हरियाणा प्रदेश के लोग देख रहे हैं। विपक्ष को रचनात्मक सुझाव नहीं देने है, बल्कि झूठ बोलकर के सदन से भाग जाना है, यही विपक्ष की सोच है। जिस प्रकार कांग्रेस की भूमिका चिंताजनक है। विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं है, केवल हाजिरी लगवानी है, विरोध करना है और झूठ फैलाना है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि— जो खुद चल नहीं पाते रास्तों पर, अक्सर वही मंजिलों पर सवाल करते हैं। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष की मजबूरी है, क्योंकि विपक्ष को खुद सरकार के खिलाफ खड़ा हुआ दिखाई देना पड़ता है। पर काश, वे जनहित में कोई रचनात्मक सुझाव भी देते, कम से कम उनके हलके के लोग तो उन्हें हल्के में न लेते।
5 हजार सुझावों से बना जनहितकारी बजट, विपक्ष कर रहा निराधार आलोचना
मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. रघुबीर कादियान को बजट भाषण बहुत लंबा लगा, इन्होंने कहा कि बजट स्पीच 3 घंटे 9 मिनट की थी, यह विधानसभा का एक रिकॉर्ड है। मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. रघुबीर कादियान सबसे सीनियर सदस्य हैं। इस सदन के अध्यक्ष भी रहे हैं। वे बताएं कि क्या बजट अभिभाषण को समय सीमा तय करने के लिए कोई फार्मूला है या क्या कांग्रेस के कार्यकाल में इसकी कोई समय सीमा तय की गई थी। इसे घंटों व मिनटों में तोलकर ऐसे अपमानित न करें। श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि मेरा यह दूसरा बजट प्रदेश के सभी हितधारकों के सुझावों को मिलाकर बनाया था।
निर्दलीय उम्मीदवार ने हमसे समर्थन मांगा तो विपक्ष को इसमें क्या आपत्ति?
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस विधायकों द्वारा राज्यसभा चुनाव प्रक्रिया प्रभावित करने के संबंध में कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने एक प्रत्याशी श्री संजय भाटिया को जीता कर दिल्ली भेजने का काम किया है। लोकतंत्र में हर व्यक्ति को चुनाव लड़ने का अधिकार है। हमने निर्दलीय उम्मीदवार को स्पोर्ट किया। विपक्ष भी अपना उम्मीदवार खड़ा कर लेते, क्यों नहीं खड़ा किया। निर्दलीय उम्मीदवार हमारे पास वोट मांगने के लिए आया तो हमने उसे स्पोर्ट किया, इसमें विपक्ष को आपत्ति क्या है। डॉ रघुबीर कादियान ने आज भी चुनाव जीत कर भी चुनावी प्रक्रिया को कांड बताया, वोट चोरी की बात की। जबकि सच्चाई यह है कि न वोट चोरी होती है, न ईवीएम में मोरी होती है, लोकतंत्र की यही तो खूबी है जनाब, जगा देती है अंतरआत्मा, अगर वो सो रही होती है। इस प्रकार के आरोप लगाना यह दुर्भाग्यपूर्ण है।
किसान से लेकर उद्योग तक हर वर्ग की भागीदारी से तैयार हुआ बजट
मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. रघुबीर कादियान द्वारा आरोप लगाया गया कि प्री-बजट परामर्श बैठक केवल बड़े उद्योगपतियों और व्यापारियों के साथ ही कीं। जबकि किसानों और किसान संगठनों से कोई संवाद नहीं किया गया। श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि यह आरोप सरासर गलत है। गत 15 जनवरी को हिसार स्थित चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में प्री-बजट परामर्श बैठक मैंने की थी। इसमें 362 किसान, किसान संगठनों के प्रतिनिधियों, एफपीओ, प्रगतिशील किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और कृषि शोधकर्ताओं ने भाग लेकर अपने सुझाव दिए। इसके अतिरिक्त, गत 22 जनवरी को कुरुक्षेत्र में आयोजित प्री-बजट परामर्श बैठक में भी भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और किसानों से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण सुझाव रखे। इसलिए यह कहना कि सरकार केवल उद्योगपतियों से मिलकर बजट बना रही है, न केवल तथ्यहीन है बल्कि उन हजारों किसानों, किसान संगठनों और विशेषज्ञों के योगदान का भी अपमान है, जिन्होंने अपनी मेहनत और अनुभव से बहुमूल्य सुझाव दिए। यह बजट किसी एक वर्ग का नहीं, बल्कि किसान, मजदूर, युवा, महिला, उद्
हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि राज्य सरकार ने बजट 2026—27 के प्रस्तावों में एस.वाई.एल. नहर के निर्माण के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, इसलिए विपक्ष का यह आरोप कि बजट में एस.वाई.एल. नहर का कहीं जिक्र नहीं है, पूरी तरह से निराधार है।
मुख्यमंत्री सत्र के दौरान बजट अनुमान 2026—27 पर जवाब दे रहे थे। नायब सैनी ने कहा कि बजट पर चर्चा के दौरान कांग्रेस के साथियों ने यह कहा कि वे तीन दिन से बजट भाषण पढ़ रहे हैं और उसमें एस.वाई.एल. नहर का कहीं जिक्र नहीं है। इन्होंने यह भी कहा कि हरियाणा के गठन के लगभग 60 वर्षों के इतिहास में ऐसा कोई बजट नहीं रहा, जिसमें एस.वाई.एल. का उल्लेख न किया गया हो। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि बजट 2026-27 के दस्तावेज खण्ड-III, जो कि पूंजीगत व्ययों का ब्यौरेवार अनुमान प्रस्तुत करता है, उसके पृष्ठ संख्या 204 पर स्पष्ट रूप से एस.वाई.एल. नहर का निर्माण के सब—हेड में 100 करोड़ का प्रावधान किया है। कांग्रेस के वर्ष 2005 से 2014 तक के दस वर्षों के कार्यकाल के बजट भाषणों के रिकॉर्ड के अनुसार केवल दो वर्षों 2005-06 और 2006-07 के बजट भाषण में ही एस.वाई.एल. नहर का उल्लेख किया था। बाकी 8 बजट भाषणों में एस.वाई.एल. शब्द का कहीं भी प्रयोग नहीं हुआ था। इतना ही नहीं, 10 में से केवल 2 वर्षों अर्थात् 2013-14 और 2014-15 के बजट में एस.वाई.एल. के निर्माण के लिए मात्र 10 लाख रुपये के बजट का प्रावधान किया था। बाकी आठ वर्षों में एक रुपये का भी प्रावधान इस सब—हेड के लिए नहीं किया था। नायब सिंह सैनी ने कहा कि वर्तमान सरकार ने तो वर्ष 2016-17 से 2025-26 तक हर साल 100 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया है। राज्यपाल द्वारा 20 फरवरी, 2026 को दिए गए अभिभाषण के पैरा नंबर-36 में भी एस.वाई.एल. के बारे में कहा गया है कि “मेरी सरकार के लिए हरियाणा के जल के अधिकारों की रक्षा सर्वोच्च प्रतिबद्धता है। हम सतलुज-यमुना लिंक नहर बनाने के लिए पूर्णतः वचनबद्ध हैं।
*****************
हरियाणा टेलीकॉम लिमिटेड से संबंधित विषय का कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से किया गया समाधान — मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मंगलवार को हरियाणा विधानसभा में बजट 2026-27 पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि विपक्ष द्वारा उठाया गया हरियाणा टेलीकॉम लिमिटेड से संबंधित विषय लगभग तीन दशकों से लंबित एक औद्योगिक इकाई और उससे जुड़े वित्तीय दायित्वों का मामला है। सरकार ने इस पूरे प्रकरण में पारदर्शिता, कानूनी प्रक्रिया और राज्य के हितों की रक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। वर्तमान राज्य सरकार ने किसी भी स्तर पर न तो नियमों से समझौता किया है और न ही राज्य के हितों की अनदेखी की है। लगभग तीन दशक पुराने इस विवाद को कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से सुलझाया गया और राज्य के हित में वर्ष 2000 से बकाया चली आ रही राशि को राज्य कोष में जमा करवाया।
नायब सिंह सैनी ने सदन को बताया कि वर्ष 1994 और 1995 के दौरान रोहतक स्थित मैसर्स हरियाणा टेलिकॉम लिमिटेड को राज्य के उद्योग विभाग द्वारा 18 करोड़ 68 लाख रुपये का ब्याज मुक्त ऋण दिया गया था। इस ऋण को औद्योगिक इकाई द्वारा पांच वर्ष की अवधि के बाद वापस करना था। कंपनी द्वारा केवल 39 लाख रुपये की राशि वापस की गई थी। शेष 18 करोड़ 29 लाख रुपये की राशि वर्ष 2000 में वापस की जानी थी। लेकिन जून, 1999 में यह कंपनी दिवालिया घोषित हो गई और इसके बाद इसने सरकार को एक रुपये का ऋण भी वापिस नहीं किया। इस प्रकरण में दिवालिया हुई कंपनी का एक और वित्तीय दायित्व जुड़ा हुआ था। मैसर्स परिवर्तन इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस कंपनी नामक एक अन्य कंपनी को भी मैसर्स हरियाणा टेलिकॉम लिमिटेड से 7 करोड़ 92 लाख रुपये की राशि वसूल करनी थी। वर्ष 1998 में मैसर्स हरियाणा टेलिकॉम लिमिटेड ने अपनी 136 कनाल 8 मरला भूमि के संबंध में उद्योग विभाग, हरियाणा के साथ मॉर्गेज डीड निष्पादित की थी। इस मॉर्गेज में पहला चार्ज मैसर्स परिवर्तन इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस कंपनी के पास था। जबकि, दूसरा चार्ज हरियाणा के उद्योग विभाग के पास था। जमीन गिरवी रखी प्राइवेट कंपनी को, सरकार ने दिया 18 करोड़ 68 लाख रुपये का ब्याज मुक्त लोन, पांच साल में सरकार को वापिस दिए सिर्फ 39 लाख रुपये। 1994 में तब कांग्रेस की सरकार थी। अपने 7 करोड़ 92 लाख रुपये की राशि की वसूली के लिए मैसर्स परिवर्तन इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस कंपनी ने फरवरी 2020 में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT), चंडीगढ़ बेंच का दरवाजा खटखटाया। कोविड के दौरान एन.सी.एल.टी. चंडीगढ़ बेंच द्वारा समाधान आवेदकों से बोलियां आमंत्रित की गई। अप्रैल 2023 में श्री अभिमन्यु मेहलावत नामक बोलीदाता की 25 करोड़ 14 लाख रुपये की सर्वोच्च बोली को NCLT, चंडीगढ़ बेंच द्वारा स्वीकृत किया गया। हरियाणा के उद्योग विभाग ने भी इस प्रक्रिया में लगभग 77 करोड़ रुपये का दावा NCLT के समक्ष रखा गया था। इसमें 18 करोड़ 29 लाख रुपये मूलधन तथा 58 करोड़ 71 लाख रुपये पीनल इंटरेस्ट शामिल था।
उन्होंने कहा कि अप्रैल 2023 में पारित अपने आदेश में NCLT, चंडीगढ़ बेंच ने हरियाणा के उद्योग विभाग को वित्तीय लेनदार के रूप में स्वीकार नहीं किया। इसी कारण, विभाग द्वारा मांगे गए पीनल इंटरेस्ट को स्वीकार नहीं किया। परिणामस्वरूप, स्वीकृत बोली राशि 25 करोड़ 14 लाख में से उद्योग विभाग, हरियाणा को 18 करोड़ 56 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई। हमने इस आदेश के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर की थी, जिसे अप्रैल 2025 में सर्वोच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया। इससे अधिक वर्तमान सरकार क्या कर सकती थी। कांग्रेस सरकार द्वारा पैदा की गई इस समस्या से जूझने के लिए। इसके बाद हमने कानूनी प्रक्रिया का पूरा सम्मान करते हुए आगे की कार्रवाई की। इसके पश्चात सितंबर 2025 में हरियाणा के एडवोकेट जनरल से कानूनी राय प्राप्त की गई। विभाग को 18 करोड़ 56 लाख रुपये की डिमांड ड्राफ्ट राशि स्वीकार करनी चाहिए और सफल बोलीदाता के पक्ष में नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट जारी कर देना चाहिए। इस कानूनी सलाह के आधार पर वित्त विभाग, हरियाणा तथा राज्य सरकार की स्वीकृति प्राप्त करने के बाद 18 करोड़ 56 लाख रुपये की राशि राज्य कोष में जमा कर दी गई। इस प्रकार लंबे समय से लंबित इस प्रकरण का समाधान किया गया। इसके बाद नवंबर 2025 में सफल बोलीदाता के पक्ष में नो डयूज सर्टिफिकेट भी जारी कर दिया गया ताकि, इस मामले को विधिवत रूप से समाप्त किया जा सके। इस पूरे प्रकरण से यह स्पष्ट है कि वर्तमान राज्य सरकार ने किसी भी स्तर पर न तो नियमों से समझौता किया है और न ही राज्य के हितों की अनदेखी की है। लगभग तीन दशक पुराने इस विवाद को कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से सुलझाया गया और राज्य के हित में वर्ष 2000 से बकाया चली आ रही राशि को राज्य कोष में जमा करवाया।
***************
विपक्ष कर्ज के गलत आंकड़े देकर जनता को कर रहा गुमराह — मुख्यमंत्री
चंडीगढ़। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने विपक्ष ने आशंका व्यक्त की है कि यदि कर्ज बढ़ता रहा तो हरियाणा भी पंजाब की तरह आर्थिक संकट में फंस सकता है और आने वाली पीढ़ियों को इसका ‘डिफर्ड बर्डन‘ झेलना पड़ेगा। विपक्ष की यह आशंका वास्तविकता से बहुत परे है। विपक्ष कर्ज के गलत आंकड़े देकर जनता को केवल गुमराह करने का काम कर रहा है। प्रदेश की आर्थिक स्थिति का आकलन केवल भावनात्मक टिप्पणियों से नहीं, बल्कि ठोस तथ्यों और आंकड़ों के आधार पर किया जाना चाहिए। हरियाणा की वित्तीय स्थिति को यदि पड़ोसी राज्य पंजाब के साथ तुलनात्मक रूप से देखा जाए, तो यह साफ दिखाई देता है कि हरियाणा आज भी आर्थिक प्रबंधन और विकास के मामले में कहीं अधिक संतुलित और मजबूत स्थिति में है।
मुख्यमंत्री बजट पर चर्चा के उपरांत जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि वर्ष 2004-05 में जब हरियाणा और पंजाब दोनों राज्यों में कांग्रेस की सरकार थीं, उस समय हरियाणा का कुल बजट 15 हजार 526 करोड़ रुपये था। जबकि, पंजाब का बजट 25 हजार 627 करोड़ रुपये था अर्थात उस समय पंजाब का बजट हरियाणा की तुलना में अधिक था। यदि उस समय के सरकारी ऋण की बात करें तो हरियाणा का कुल ऋण 17 हजार 347 करोड़ रुपये था, जो बजट का लगभग 112 प्रतिशत था। जबकि, पंजाब का कुल ऋण 37 हजार 796 करोड़ रुपये था, जो उनके बजट का लगभग 147 प्रतिशत था। इसका अर्थ यह है कि उस समय भी पंजाब की वित्तीय स्थिति हरियाणा की तुलना में अधिक दबाव में थी। वर्ष 2005-06 और 2006-07 में भी यही स्थिति बनी रही, जब हरियाणा में कांग्रेस सरकार का बजट पंजाब की कांग्रेस सरकार से कम था परंतु पंजाब के बजट का ऋण प्रतिशत हरियाणा से ज्यादा था।
सैनी ने कहा कि यदि हम हाल के वर्षों की स्थिति देखें तो वर्ष 2021-22 में जब पंजाब में कांग्रेस की सरकार थी और हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी, उस समय हरियाणा का बजट 1 लाख 35 हजार 910 करोड़ रुपये था और कुल ऋण बजट का लगभग 167 प्रतिशत था। वहीं, पंजाब का बजट हरियाणा से कम होकर 1 लाख 25 हजार 501 करोड़ रुपये था, लेकिन उसका कुल ऋण बजट का लगभग 186 प्रतिशत था अर्थात उस समय भी पंजाब पर कर्ज का बोझ हरियाणा की तुलना में अधिक था जबकि हरियाणा का बजट पंजाब से ज्यादा हो गया था। वर्तमान स्थिति देखें तो यह अंतर और स्पष्ट दिखाई देता है। वर्ष 2026-27 के बजट में हरियाणा का कुल बजट 2 लाख 23 हजार 658 करोड़ रुपये है और कुल ऋण बजट का लगभग 175 प्रतिशत है। वहीं, दूसरी ओर पंजाब का कुल बजट केवल 1 लाख 80 हजार 437 करोड़ रुपये है। लेकिन, उसका कुल ऋण उसके बजट का लगभग 248 प्रतिशत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार ने वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए विकास की गति को भी तेज किया है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्यो
मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष ने हरियाणा प्रदेश पर भी कर्ज के बारे में अलग—अलग आंकड़े देकर सदन और प्रदेश की जनता को गुमराह किया है। उन्होंने आंकड़े देते हुए कहा कि वर्ष 2014-15 का लोन 96 हजार 875 करोड़ (70,925+25,950), जो 2014-15 की जी.एस.डी.पी. 4 लाख 37 हजार 145
इंडस्ट्रियल सेक्टर का कर्ज
नायब सिंह सैनी ने कहा कि श्री बतरा ने उद्योगों के बारे में सवाल उठाया है कि हरियाणा में बड़ी-बड़ी इंडस्ट्रीज हैं जैसे ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स आदि। इन उद्योगों पर भी लगभग 1 लाख 85 हजार 767 करोड़ रुपये का कर्ज है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्ष के सदस्य बताएं कि क्या बड़े-बड़े उद्योगों का कर्ज सरकार ने चुकाना होता है? क्या इनके पास किसी बैंक अथवा वाणिज्यिक संस्थान का अनुरोध आया है कि उनके द्वारा किसी उद्योग को दिया गया कर्ज सरकार से दिलवाया जाए ? अब की बात तो छोड़ो, ये अपने कार्यकाल का भी कोई उदाहरण बताएं, जिसमें उद्योगों का कर्ज सरकार द्वारा चुकाये जाने की बात हुई हो।
*****************
विपक्ष के आरोप तथ्यहीन, हरियाणा की वित्तीय स्थिति मजबूत: मुख्यमंत्री सैनी
कर्ज और बजट वृद्धि पर मुख्यमंत्री का जवाब, विपक्ष के आंकड़ों को बताया भ्रामक
चंडीगढ़। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विधानसभा में बजट 2026-27 पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे आरोप तथ्यों से परे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए विकास कार्यों को गति दे रही है।
कर्ज को लेकर श्वेत पत्र की जरूरत नहीं, सभी आंकड़े सार्वजनिक मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के कुछ विधायकों द्वारा यह कहा गया कि प्रदेश कर्ज में डूबा हुआ है, जबकि वास्तविकता इससे अलग है। उन्होंने बताया कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार के समय वर्ष 2014-15 में राज्य पर 96 हजार 875 करोड़ रुपये का कर्ज था, जो उस समय की 4 लाख 37 हजार 145 करोड़ रुपये की जीएसडीपी का 22.16 प्रतिशत था। उस समय वित्त आयोग द्वारा ऋण लेने की अधिकतम सीमा 22.9 प्रतिशत निर्धारित की गई थी, जबकि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इस सीमा से ऊपर कर्ज ले रखा था। कुछ कांग्रेस विधायकों ने राज्य की ऋण देनदारी को लेकर भ्रामक आंकड़े प्रस्तुत किए हैं और कर्ज को लेकर श्वेत पत्र जारी करने की मांग भी की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य के सभी ऋण संबंधी आंकड़े सीएजी और आरबीआई की रिपोर्ट तथा राज्य के वार्षिक बजट दस्तावेजों में उपलब्ध हैं, जो सार्वजनिक रूप से देखे जा सकते हैं। इसलिए कर्ज को लेकर अलग से श्वेत पत्र जारी करने की कोई आवश्यकता नहीं है।
बजट में वास्तविक वृद्धि 8 से 9.24 प्रतिशत
नायब सिंह सैनी ने बजट में वृद्धि को लेकर उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए कहा कि यह कहना कि महंगाई दर को हटाने के बाद बजट में केवल 4 प्रतिशत वृद्धि हुई है, सही नहीं है। यदि वर्ष 2022-23 की कीमतों के आधार पर तुलना की जाए तो वर्ष 2025-26 का बजट अनुमान 1 लाख 93 हजार 294 करोड़ रुपये और संशोधित बजट 1 लाख 91 हजार 156 करोड़ रुपये बनता है। इसी प्रकार वर्ष 2026-27 का बजट अनुमान 2 लाख 8 हजार 831 करोड़ रुपये है। इस प्रकार वास्तविक रूप से वर्ष 2026-27 के बजट अनुमान में वर्ष 2025-26 के बजट अनुमान की तुलना में 8 प्रतिशत तथा संशोधित बजट की तुलना में 9.24 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के कुछ विधायकों ने आय बढ़ाने को लेकर भी सवाल उठाए हैं और आबकारी से संबंधित वसूली पर भी टिप्पणी की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हरियाणा आबकारी नीति के तहत खुदरा जोनों का आवंटन ऑनलाइन निविदा प्रक्रिया के माध्यम से निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से किया जा रहा है, जिससे निविदा प्रक्रिया में भाग लेने वाले लाइसेंस धारकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2025-27 की आबकारी नीति के तहत 1 हजार 194 खुदरा जोनों के लिए 1 हजार 957 ई-बिड प्राप्त हुईं और 25 जुलाई 2025 को निर्धारित समय सीमा के भीतर बोली प्रक्रिया पूरी हो गई। इस प्रक्रिया के माध्यम से सरकार को खुदरा लाइसेंस शुल्क के रूप में 14 हजार 342 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 13.25 प्रतिशत अधिक है।
मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि 21 महीनों की अवधि वाली आबकारी नीति 2025-27 के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में 14 हजार 64
*****************
चार विधेयक पुरःस्थापित किए
विधानसभा में बजट सत्र के दौरान आज चार विधेयक पुरःस्थापित किए गए। पुरःस्थापित किए गए विधेयकों में हरियाणा पुलिस (संशोधन) विधेयक, 2026, हरियाणा राजकोषीय उत्तरदायित्व तथा बजट प्रबन्धन (संशोधन) विधेयक, 2026, हरियाणा नगरीय क्षेत्र विकास तथा विनियमन (संशोधन) विधेयक, 2026 और हरियाणा परियोजना भूमि समेकन (विशेष उपबंध) संशोधन विधेयक, 2026 शामिल हैं।




