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आईओसी ने ट्रांसजेंडर के महिला खेलों में भाग लेने पर रोक लगाई

2028 ओलंपिक से लागू होंगे नए नियम

अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) ने ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों को ओलंपिक में महिलाओं की श्रेणी में प्रतिस्पर्धा करने से प्रतिबंधित कर दिया है और अपने सदस्य संगठनों से महिलाओं की प्रतियोगिताओं के लिए अनिवार्य जेनेटिक परीक्षण कराने को कहा है। पिछले वर्ष किर्स्टी कोवेंट्री के आईओसी की पहली महिला अध्यक्ष बनने के बाद यह सबसे महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है। बोर्ड की बैठक और वैश्विक खेल जगत के सबसे विवादास्पद मुद्दों में से एक पर महीनों से चल रही अटकलों के बाद यह निर्णय लिया गया है। ये नए नियम 2028 में लॉस एंजिल्स में होने वाले अगले ओलंपिक से लागू होंगे। जिम्बाब्वे की प्रतिष्ठित ओलंपिक तैराक किर्स्टी कोवेंट्री ने संगठन का नेतृत्व करने के लिए अपने अभियान के दौरान बार-बार कहा था कि ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों की भागीदारी को लेकर चल रही व्यापक और अक्सर तीखी बहस के बीच महिलाओं की श्रेणी की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है।

जीन परीक्षण से तय होगी पात्रता

नई नीति के तहत पात्रता का निर्धारण एक बार किए जाने वाले जीन परीक्षण से किया जाएगा। पहले से ही ट्रैक एंड फील्ड में उपयोग किया जा रहा यह परीक्षण लार, गाल के स्वैब या रक्त के नमूने के जरिए किया जाएगा। आईओसी ने इस जटिल मुद्दे पर निर्णय लेने से पहले कई विशेषज्ञों से परामर्श किया। पिछले वर्ष के अंत में आईओसी की मेडिकल और वैज्ञानिक निदेशक तथा कनाडा की पूर्व ओलंपिक रोवर डॉ. जेन थॉर्नटन ने ट्रांसजेंडर या यौन विकास में अंतर (डीएसडी) वाले खिलाड़ियों पर एक समीक्षा के प्रारंभिक निष्कर्ष प्रस्तुत किए। यह विश्लेषण सार्वजनिक नहीं किया गया, लेकिन इसमें कहा गया कि पुरुष जैविक लक्षणों के साथ जन्मे खिलाड़ियों में शारीरिक बढ़त बनी रहती है, यहां तक कि उन खिलाड़ियों में भी जिन्होंने टेस्टोस्टेरोन कम करने का उपचार लिया हो।

अब नहीं चलेगा कम टेस्टोस्टेरोन स्तर

अब तक आईओसी के दिशा-निर्देश ट्रांसजेंडर महिलाओं को कम टेस्टोस्टेरोन स्तर के साथ प्रतिस्पर्धा की अनुमति देते थे, लेकिन अंतिम निर्णय अलग-अलग खेल महासंघों पर छोड़ दिया जाता था। ट्रैक एंड फील्ड, तैराकी, मुक्केबाजी और रग्बी जैसे खेलों में आमतौर पर ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों को महिलाओं की श्रेणी में प्रतिस्पर्धा करने से प्रतिबंधित किया जाता है। महिलाओं के खेल, ट्रांसजेंडर मुद्दों पर चल रही ध्रुवीकृत और सार्वजनिक बहस का एक अहम केंद्र रहे हैं। यह बहस पिछले वर्ष और तेज हो गई थी जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों को महिलाओं के कॉलेज खेलों में भाग लेने से प्रतिबंधित कर दिया था।

पेरिस में हुआ था विवाद

पिछले मार्च में ट्रैक एंड फील्ड पहला प्रमुख खेल बना, जिसने महिलाओं की प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले खिलाड़ियों के लिए अनिवार्य डीएनए सेक्स परीक्षण लागू किया। यह कदम 2024 के पेरिस ओलंपिक के दौरान पात्रता विवाद के उभरने के एक साल से भी कम समय बाद उठाया गया, जब मुक्केबाजी प्रतियोगिता दो महिला खिलाड़ियों की भागीदारी को लेकर रिंग के अंदर और बाहर विवादों से घिर गई थी। हालांकि वे दोनों अंततः स्वर्ण पदक जीतने में सफल रहीं।

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