
पश्चिम एशिया में जारी जंग को एक माह हो गया है। इस दौरान बाजार में उठा-पटक जोरदार है. तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं. बाजार दवाब में हैं. सोना और चांदी पहले चमके, फिर गिरे. बॉन्ड्स ने कुछ राहत दी है और जो निवेशक सिर्फ एक जगह पैसा लगाए बैठे थे, वो सबसे ज्यादा नुकसान में हैं. यही वो वक्त है जब एक पुरानी बात फिर साबित होती है कि किसी एक एसेट पर निर्भर नहीं रहना चाहिए फिर चाहे वो इक्विटी हो, डेट हो या सोना. लेकिन एक व्यक्ति कहां-कहां निवेश करे? आम निवेशक के पास क्या विकल्प हैं? इसलिए एक ऐसा निवेश का ऑप्शन आपकी सभी जरूरतों को पूरा कर सकता है। आप बस हर महीने पैसा डालते रहो और आपका पैसा हर जगह निवेश होता रहेगा. फिर शेयर हो या सोना. एसेट अलोकेशन का मतलब होता है कि आप अपना पैसा कहां-कहां डाल रहे हैं और इसका सबसे आसान रास्ता है मल्टी एसेट्स एलोकेशन फंड। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान भू-राजनीतिक परिस्थितियों, राजनीतिक अनिश्चितता और वैश्विक महंगाई के दबाव को देखते हुए निवेशकों को मल्टी-एसेट रणनीति को प्राथमिकता देनी चाहिए, क्योंकि विविधीकरण (डाइवर्सिफिकेशन) अशांत समय में जोखिम को कम करने में मदद करता है। वर्तमान भू-राजनीतिक परिस्थितियों में अमेरिका-इजराइल-ईरान संघर्ष, वैश्विक महंगाई का दबाव और राजनीतिक अनिश्चितता शामिल हैं। इनको देखते हुए निवेशकों को मल्टी-एसेट रणनीति अपनानी चाहिए। । ऐसे माहौल में मल्टी-एसेट फंड निवेशकों के लिए एक आदर्श विकल्प बन जाते हैं, क्योंकि ये इक्विटी, डेट, कमोडिटी और कीमती धातुओं में निवेश का अवसर देते हैं। मल्टी-एसेट फंड ऑटोमैटिक रीबैलेंसिंग, प्रोफेशनल मैनेजमेंट और डायनेमिक एसेट एलोकेशन प्रदान करते हैं, जो खासतौर पर अधिक अस्थिरता के समय में उपयोगी होता है। साथ ही यह समय अत्यधिक आक्रामक होने का नहीं है, बल्कि एक संतुलित और विविधीकृत पोर्टफोलियो बनाए रखने का है, जो झटकों को सह सके और संभावित बढ़त में भी भाग ले सके।
केवल फंड स्तर पर विविधीकरण सही नहीं
विशेषज्ञों के अनुसार पिछले दिनों वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी के कारण सोने की कीमतों में तेजी आई है। चांदी को औद्योगिक मांग और कीमती धातु के रूप में उसकी पारंपरिक भूमिका दोनों का लाभ मिला है, जबकि इक्विटी बाजार उच्च विदेशी निवेश (एफआईआई इनफ्लो), मजबूत आय संभावनाओं और मैक्रो स्थिरता के कारण अपने सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। इन सकारात्मक रुझानों के कारण इस श्रेणी ने निवेशकों को आकर्षित किया। लेकिन, अब हालात बदल चुके हैं। सोना और चांदी अपने उच्चतम स्तर से काफी नीचे आ चुके हैं। ऐसे में एक ही श्रेणी के निवेशक काफी दिक्कत में आ चुके हैं। इसके लिए अगर आपने अलग-अलग एसेट में निवेश किया होता तो बेहतर रहता। हालांकि, यह ध्यान रखना चाहिए कि केवल फंड स्तर पर विविधीकरण करना सही नहीं है, क्योंकि जरूरत पड़ने पर विभिन्न एसेट क्लास के बीच पुनः आवंटन करना मुश्किल हो जाता है।
कुछ विशेषज्ञ बताते हैं कि 29 मल्टी-एसेट फंड्स में से अधिकांश फंड्स में 65% से अधिक निवेश इक्विटी में, 25% डेट में और लगभग 10% अन्य (जैसे सोना/कमोडिटी) में होता है। डीएसपी मल्टी एसेट एलोकेशन फंड एक अपवाद है, जिसमें लगभग 88% निवेश ‘अन्य’ श्रेणी में है। अधिकांश योजनाओं में एक जैसी संरचना होने से विविधीकरण और लचीलापन दोनों सीमित हो जाते हैं। चूंकि इक्विटी हिस्सा अक्सर लार्ज-कैप शेयरों में केंद्रित होता है, इसलिए कई बार ऐसे फंड्स में निवेश करने पर भी पर्याप्त विविधीकरण नहीं मिल पाता। वे सलाह देते हैं कि सिर्फ मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड्स पर निर्भर रहने के बजाय निवेशकों को अपने पूरे पोर्टफोलियो स्तर पर एसेट एलोकेशन तय करना चाहिए। कई बार एक कस्टमाइज्ड इक्विटी-डेट मिश्रण के जरिए समान या बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकते हैं।
फ्लेक्सी-कैप और बैलेंस्ड एडवांटेज फंड्स भी विकल्प
इसके बावजूद मल्टी-एसेट फंड्स में निवेशकों की रुचि लगातार बढ़ रही है। मध्यम जोखिम प्रोफाइल वाले नए निवेशकों के लिए मल्टी-एसेट फंड्स के साथ फ्लेक्सी-कैप और बैलेंस्ड एडवांटेज फंड्स भी एक अच्छा विकल्प है। पिछले एक वर्ष में 24 मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड्स में से 8 ने दो अंकों (डबल डिजिट) का रिटर्न दिया, 14 ने एक अंक (सिंगल डिजिट) का रिटर्न दिया, जबकि 2 फंड्स ने नकारात्मक रिटर्न दिया। कई बार मल्टी-एसेट फंड्स अपनी पूर्व-निर्धारित एलोकेशन संरचना के कारण हर एसेट की पूरी क्षमता का लाभ नहीं उठा पाते। ये फंड्स अभी भी इक्विटी पर अधिक निर्भर रहते हैं और इक्विटी फंड्स से बहुत अलग नहीं हैं। यदि निवेशक पहले से ही अपने पोर्टफोलियो स्तर पर एसेट मिक्स तय कर रहे हैं, तो मल्टी-एसेट फंड जोड़ने से अनावश्यक दोहराव या एक ही एसेट में अधिक निवेश (कंसंट्रेशन) हो सकता है, खासकर जब फंड इक्विटी की ओर झुका हुआ हो। एसे निवेशकों को मल्टी-एसेट एलोकेशन फंड्स से बचने पर विचार करना चाहिए और अपनी वित्तीय लक्ष्यों और जोखिम प्रोफाइल के अनुसार इक्विटी और डेट में अलग-अलग निवेश करना चाहिए। इससे बेहतर रिटर्न, दीर्घकालिक वृद्धि और संपत्ति निर्माण की आदर्श रणनीति बन सकती है। जबकि नए व आम निवेशकों के लिए मल्टी एसेट फंड एक बेहतर विकल्प रहता है। भले ही कुछ परिस्थितयों में इसमें रिटर्न कम हो सकता है, लेकिन जोखिम घटाने के लिए यह बेहतर विकल्प है। हाल के आंकड़े गवाह हैं कि इस फंड ने अनेक मामलों में बेहतर रिटर्न भी दिया है। इसके बावजूद निवेश हमेशा अपनी जोखिम क्षमता, निवेश अवधि और वित्तीय लक्ष्यों के आधार पर ही करना चाहिए।




