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ऑस्ट्रेलिया की जेब भर रहे चमगादड़

ग्रे-हेडेड फ्लाइंग फॉक्स दुनिया के सबसे बड़े चमगादड़ों में से एक है। इसका वजन दो पाउंड (लगभग 1 किलो) से अधिक हो सकता है और इसके पंखों का फैलाव पाँच फीट से भी ज्यादा होता है। जब यह ऑस्ट्रेलिया के पूर्वी तटीय क्षेत्रों में प्रवास करता है, तो इसके साथ एक दिलचस्प घटना होती है जिसे वैज्ञानिक “सीड रेन” कहते हैं—ये जानवर बिना रुके उड़ते हुए ही मल त्याग करते हैं, जिससे बीज जमीन पर गिरते रहते हैं।

चमगादड़ों की छवि बहुत अच्छी नहीं रही है—उन्हें इबोला और कोविड जैसी महामारियों के लिए दोषी ठहराया गया है। फ्लाइंग फॉक्स भी इस धारणा से अछूते नहीं रहे। ऑस्ट्रेलिया में कभी इन्हें कीट माना जाता था और इनकी बड़ी-बड़ी कॉलोनियों (जो “कई लाख” तक हो सकती हैं) को खत्म करने के लिए नेपाम जैसे हथियारों का इस्तेमाल किया जाता था।

लेकिन अब यह समझ में आ रहा है कि फ्लाइंग फॉक्स इंसानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। “साइंटिफिक रिपोर्ट्स” जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, इन चमगादड़ों ने ऑस्ट्रेलिया के लकड़ी उद्योग को बड़ा आर्थिक लाभ पहुंचाया है।

यह अध्ययन ऑस्ट्रेलिया की राष्ट्रीय विज्ञान एजेंसी द्वारा एकत्र किए गए 1,200 से अधिक रोस्टिंग स्थलों के डेटा पर आधारित था। शोधकर्ताओं ने पाया कि फ्लाइंग फॉक्स 9.1 करोड़ (91 मिलियन) से अधिक पेड़ों के उगने के लिए जिम्मेदार हैं, जिनमें अधिकांश यूकेलिप्टस हैं। इससे ऑस्ट्रेलिया की अर्थव्यवस्था को हर साल लगभग 195 मिलियन से 673 मिलियन डॉलर तक का लाभ होता है।

दुनिया भर में लगभग 1,500 चमगादड़ प्रजातियों के आर्थिक लाभ का आकलन करने वाला यह केवल तीसरा अध्ययन है—और ऑस्ट्रेलिया में पहला। अन्य अध्ययनों से पता चला है कि चमगादड़ टेक्सास में कपास और मक्का की फसलों की रक्षा करने से लेकर मेक्सिको के टकीला उद्योग को बचाने तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

ऑस्ट्रेलिया के फ्लाइंग फॉक्स पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बेहद जरूरी हैं। वे पेड़ों के फूलों का परागण करते हैं और उड़ते समय बीजों को फैलाते हैं। इस कारण कई पेड़ प्रजातियाँ इन पर निर्भर हो गई हैं। वैज्ञानिक इसे “सह-विकास” (co-evolution) का उदाहरण मानते हैं, जहां कुछ पौधे और चमगादड़ प्रजातियाँ एक-दूसरे के साथ विकसित होती हैं।

फ्लाइंग फॉक्स को “मेगा-डिस्पर्सर” भी कहा जाता है क्योंकि वे पक्षियों और मधुमक्खियों की तुलना में कहीं ज्यादा दूरी तक उड़ते हैं और बड़े आकार के बीजों को भी फैला सकते हैं।

शोधकर्ताओं ने इनके प्रभाव को “बैट रिपल इफेक्ट” नाम दिया है, क्योंकि ये कुछ ही दिनों में सैकड़ों मील की दूरी तय कर कई पारिस्थितिक तंत्रों को प्रभावित करते हैं। यह खासतौर पर महत्वपूर्ण है क्योंकि ऑस्ट्रेलिया का प्राकृतिक पर्यावरण जंगल की आग और मानव गतिविधियों से प्रभावित हो रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि फ्लाइंग फॉक्स ऑस्ट्रेलिया के जंगलों को जोड़कर रखने वाले “गोंद” की तरह काम करते हैं और उनकी आनुवंशिक विविधता को बनाए रखते हैं—खासतौर पर तब, जब जंगल बार-बार आग से प्रभावित हो रहे हों।

हालांकि ये चमगादड़ जल्द खत्म होने वाले नहीं हैं, लेकिन आवास की कमी, जंगल की आग और अत्यधिक गर्मी जैसी चुनौतियों से जूझ रहे हैं। एक ही गर्म दिन में हजारों चमगादड़ों की मौत हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इनके संरक्षण को उतनी ही गंभीरता से लिया जाना चाहिए जितना मधुमक्खियों के लिए किया जाता है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, यदि फ्लाइंग फॉक्स नहीं होंगे, तो इसका असर धीरे-धीरे दिखाई देगा—लेकिन अंततः कुछ पेड़ प्रजातियाँ उग ही नहीं पाएंगी या उनके बीज फैल नहीं सकेंगे।

जैसा कि एक विशेषज्ञ ने कहा, “हमें बचपन से ही चमगादड़ों से डरना सिखाया जाता है, लेकिन दुनिया के सबसे नापसंद किए जाने वाले जीवों की भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।”

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