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54 साल के बाद चांद का चक्कर लगाएगा मानव

नासा चार अंतरिक्ष यात्रियों भेज रहा मून मिशन पर

नासा चार अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा के चारों ओर यात्रा कराकर वापस लाने की तैयारी कर रहा है। इनमें तीन अमेरिका और एक कनाडा से है। 1972 में अपोलो 17 मिशन के बाद यह पहली बार होगा जब कोई मानव पृथ्वी से इतनी दूर यात्रा करेगा। यदि नासा का यह आर्टेमिस II मिशन सफल होता है, तो इस दशक के अंत तक चंद्रमा की सतह पर अंतरिक्ष यात्रियों को ले जाने वाले मिशन शुरू हो सकते हैं।

स्पेस लॉन्च सिस्टम (एसएलएस) रॉकेट क्या है?

यह नासा का नया विशाल रॉकेट है, जो अपोलो मिशनों में उपयोग किए गए सैटर्न 5 का आधुनिक संस्करण है। इसकी ऊंचाई 322 फीट है और ईंधन भरने पर इसका वजन 57.5 लाख पाउंड होता है। यह नासा के केनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च होगा और लगभग 60,000 पाउंड भार को चंद्रमा तक भेज सकता है। इसका डिजाइन 1970 के दशक में विकसित स्पेस शटल तकनीकों का मिश्रण है। नासा ने एसएलएस रॉकेट और ओरियन कैप्सूल का डिजाइन तैयार किया है, जबकि स्पेसएक्स और ब्लू ओरिजिन को भविष्य के मिशनों के लिए मून लैंडर बनाने का काम दिया गया है। नासा ने 2023 में चार अंतरिक्ष यात्रियों का चयन किया गया था और तब से वे इस मिशन की तैयारी कर रहे हैं। तीन नासा अंतरिक्ष यात्री कमांडर रीड वाइसमैन, पायलट विक्टर ग्लोवर और मिशन विशेषज्ञ क्रिस्टीना कोच पहले इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर जा चुके हैं। विक्टर ग्लोवर चंद्रमा की परिक्रमा करने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति होंगे व क्रिस्टिना कोच यह उपलब्धि हासिल करने वाली पहली महिला होंगी। कनाडा के मिशन विशेषज्ञ जेरेमी हानसन अभी तक अंतरिक्ष में नहीं गए हैं। वे पहले ऐसे व्यक्ति होंगे जो नासा के अंतरिक्ष यात्री नहीं हैं और इस यात्रा का हिस्सा बनेंगे। ओरियन अंतरिक्ष यान इन अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा तक ले जाएगा और वापस लाएगा। इसका ऊपरी हिस्सा (क्रू मॉड्यूल) पृथ्वी पर लौटेगा और प्रशांत महासागर में सैन डिएगो के तट के पास उतरेगा।

इस यान के दो मुख्य हिस्से हैं-

क्रू मॉड्यूल : जिसमें अंतरिक्ष यात्री 10 दिनों तक रहेंगे

सर्विस मॉड्यूल : इसे यूरोपियन स्पेस एजेंसी ने बनाया है, इसमें प्रोपल्शन, ऊर्जा और लाइफ सपोर्ट प्रणाली होती है। इस कैप्सूल को इंटीग्रिटी नाम दिया गया है और यह 21 दिनों तक चार अंतरिक्ष यात्रियों को सहारा दे सकता है।

नासा फिर से चंद्रमा पर क्यों जा रहा है?

जब नील आर्मस्टांग ने चंद्रमा पर कदम रखा, तब कई लोगों ने माना कि स्पेस रेस जीत ली गई है और आगे के मिशन जरूरी नहीं हैं। इसके बाद दशकों तक नासा ने पृथ्वी की निचली कक्षा में स्पेस शटल और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर ध्यान केंद्रित किया। डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल में चंद्रमा पर जाना प्राथमिकता बना और यह कार्यक्रम जो बाइडन के कार्यकाल में भी जारी रहा।

आर्टेमिस मिशनों का विवरण

आर्टेमिस I (2022): नवंबर 2022 में लॉन्च हुआ पहला मिशन, जिसमें बिना मानव के ओरियन कैप्सूल को चंद्रमा की कक्षा में भेजा गया। यह 26 दिन बाद पृथ्वी पर लौटा।

आर्टेमिस II (वर्तमान मिशन):
इसका उद्देश्य ओरियन के लाइफ सपोर्ट और अन्य महत्वपूर्ण सिस्टम का परीक्षण करना है। यदि पृथ्वी की कक्षा में कोई समस्या आती है, तो अंतरिक्ष यात्रियों को वापस बुलाया जाएगा। यह मिशन फ्री रिटर्न ट्रेजेक्टरी पर होगा यानी चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति ही यान को वापस पृथ्वी की ओर मोड़ देगी, बिना इंजन चलाए। चंद्रमा के दूर वाले हिस्से से गुजरते समय अंतरिक्ष यात्री उन क्षेत्रों को देखेंगे, जिन्हें मानव ने पहले कभी नहीं देखा। इस दौरान 30 से 50 मिनट तक संचार बाधित रहेगा।

भविष्य के मिशन

पहले योजना थी कि आर्टेमिस III 2028 तक चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग करेगा, लेकिन अब इसे 2027 तक पृथ्वी की कक्षा में परीक्षण उड़ान के रूप में बदला गया है। इसके बाद आर्टेमिस IV और V (2028) में लैंडिंग के प्रयास हो सकते हैं।

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