
भारत के प्रमुख उद्योगपतियों में से एक अनिल अंबानी, डोनाल्ड ट्रंप के पहले कार्यकाल के शुरुआती दिनों में यह समझने के इच्छुक थे कि भारत नए राष्ट्रपति की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति में कहाँ फिट बैठता है। 2017 में इसी कोशिश ने उन्हें जेफ्री एपस्टीन तक पहुंचाया, जो एक दोषी यौन अपराधी था। उसके पास राजनेताओं, राजनयिकों और नीति-निर्माताओं का बड़ा नेटवर्क था, जिससे वह खुद को व्हाइट हाउस के अंदरूनी जानकार यानी इनसाइडर और मार्गदर्शक के रूप में प्रस्तुत करता था। ऑनलाइन परिचय के तुरंत बाद अंबानी ने एपस्टीन को लिखा कि उन्हें भारत-अमेरिका संबंध और रक्षा सहयोग के लिए व्हाइट हाउस से निपटने में मार्गदर्शन की आवश्यकता होगी। एपस्टीन ने उन्हें अंदरूनी जानकारी देने का वादा किया। इन संदेशों से पता चलता है कि एपस्टीन का प्रभाव वैश्विक स्तर तक फैला हुआ था और उसने दुनिया के अमीर लोगों के बीच एक ऐसे पावर ब्रोकर की छवि बना ली थी, जो बैक-चैनल कूटनीति में काम कर सकता था। कई बार उसने अमेरिकी विदेश नीति और ट्रंप प्रशासन की नियुक्तियों के बारे में ऐसी जानकारी साझा की, जो बाद में सही साबित हुई। उदाहरण के तौर पर, मार्च 2017 में अंबानी ने पूछा कि क्या डेविड पेट्रियस को भारत में अमेरिकी राजदूत बनाया जाएगा। एपस्टीन ने बाद में बताया कि यह संभावना कम है। अंततः यह पद केनेथ आई. जस्टर को मिला। इसी तरह जुलाई 2017 में एपस्टीन ने कहा कि जॉन आर. बोल्टन, एच. आर. मैकमास्टर की जगह राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बनेंगे जो कुछ महीनों बाद सच साबित हुआ।
एपस्टीन ने अंबानी को स्टीव बैनन और थॉमस जे. बैरैक जैसे ट्रंप के करीबी लोगों से मिलवाने की पेशकश भी की। वहीं भारत में अंबानी खुद को नरेंद्र मोदी सरकार से जुड़े प्रभावशाली व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत करते थे और उन्होंने ट्रंप के दामाद जारेड कुशनर से मुलाकात कराने में मदद मांगी थी। हालांकि अंबानी पर किसी भी प्रकार के आपराधिक या अनुचित व्यवहार के आरोप नहीं लगे हैं। संदेशों में वित्तीय और राजनीतिक चर्चाओं के साथ-साथ कुछ अस्पष्ट और संदिग्ध संदर्भ भी थे, जैसे डेजर्ट और फन जैसे शब्द, जिनका स्पष्ट अर्थ सामने नहीं आता। यह बातचीत उस समय भी जारी रही जब एपस्टीन पहले से ही एक दोषी यौन अपराधी के रूप में पंजीकृत था और 2008 में नाबालिग से वेश्यावृत्ति कराने के आरोप में जेल की सजा काट चुका था।
असल में अनिल अंबानी अपने वैश्विक प्रभाव को बढ़ाने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन समय के साथ उनकी संपत्ति में भारी गिरावट आई। 2007 में लगभग 45 अरब डॉलर से घटकर 2019 में करीब 1.7 अरब डॉलर रह गई, जबकि उनके भाई की संपत्ति बढ़कर लगभग 100 अरब डॉलर तक पहुंच गई। एपस्टीन और अंबानी के बीच संबंधों में सुल्तान अहमद बिन सुलायेम की भी भूमिका बताई गई, जिन्होंने दोनों को जोड़ा था। अमेरिका-भारत संबंधों के संदर्भ में एपस्टीन ने सलाह दी कि अगर भारत इजराइल से रक्षा खरीद बढ़ाए, तो व्हाइट हाउस की नजर में उसकी स्थिति बेहतर हो सकती है। बाद में भारत ने लगभग 2 अरब डॉलर के रक्षा सौदे किए। 2019 में जब अंबानी के व्यवसाय में संकट आया और उन्हें अपने भाई से आर्थिक मदद लेनी पड़ी, तब भी एपस्टीन उनसे संपर्क में रहा और सलाह देता रहा। जुलाई 2019 में एपस्टीन ने आखिरी बार अंबानी से संपर्क किया। इसके तीन दिन बाद उसे नाबालिगों की सेक्स तस्करी के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया।




