
दुश्मन के इलाके में फंस जाएं तो क्या करना चाहिए? यह एक ऐसा सवाल है जिसका जवाब हर वायुसैनिक के पास होता है और उसे इसका पूरा प्रशिक्षण भी दिया जाता है। इतना ही नहीं दुश्मन के हाथ पड़ने पर क्या करना होता है, यह भी उसे मालूम होता है। युद्ध के बीच ईरान में फंसे घायल अमेरिकी वायुसेना के जवान ने अपनी ट्रेनिंग, भूभाग की समझ और कड़े अनुशासन के सहारे एक दिन से अधिक समय तक जीवित रहने में सफलता पाई। ईरान द्वारा उसका एफ-15ई स्ट्राइक ईगल विमान मार गिराने के बाद वह शत्रु के इलाके फंस गया था। रविवार को अमेरिकी सेना द्वारा सुरक्षित बचाए जाने के बाद मीडिया में उसके जज्बे की कहानी बाहर आई है। वह एक पहाड़ी दरार (क्रेविस) में छिपकर और लगातार स्थान बदलते हुए, अपने ठिकाने के करीब पहुंच रही ईरानी खोज टीमों से बचता रहा। एक पिस्तौल, संचार उपकरण और ट्रैकिंग बीकन जैसे सीमित संसाधनों के साथ उसने ऊबड़-खाबड़ और खड़ी पहाड़ियों वाले इलाके में रास्ता तय किया। एक समय पर वह समुद्र तल से लगभग 7,000 फीट ऊंची पहाड़ी रिज लाइन तक चढ़ गया, ताकि उसके बचने और बचाव (रेस्क्यू) की संभावना बढ़ सके।
सर्वाइवल प्रोटोकॉल का पालन किया
अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि वायुसेना के इस जवान ने ऐसे हालात के लिए बनाए गए सर्वाइवल प्रोटोकॉल का पालन किया। पहचान से बचना, जहां संभव हो संचार बनाए रखना और ऐसे इलाके तक पहुंचना जहां छिपने और निगरानी दोनों की सुविधा दे। अकेला और घायल होने के बावजूद वह ईरानी बलों से आगे बना रहा, जो सक्रिय रूप से उसकी तलाश कर रहे थे। ईरानी अधिकारियों द्वारा उसके बारे में सूचना देने पर इनाम घोषित करने के बाद आम नागरिक भी खोज अभियान में शामिल हो गए थे।
दुश्मन के इलाके में अकेले संघर्ष
इस पायलट की यह कठिन परीक्षा तब शुरू हुई जब अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के बीच उसका विमान मार गिराया गया। यह युद्ध शुरू होने के बाद ईरान के भीतर ऐसा पहला हादसा था। जमीन पर गिरते ही एक जटिल और उच्च जोखिम वाला बचाव अभियान शुरू कर दिया गया। अमेरिकी सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने उसके मूवमेंट पर रियल-टाइम में नजर रखी, खतरों का आकलन किया और बचाव के लिए सही मौके का इंतजार किया।
कभी ऑफ द ग्रिड नहीं हुआ
अधिकारियों के अनुसार, वह पूरी तरह कभी ऑफ द ग्रिड नहीं हुआ, क्योंकि उसका ट्रैकिंग बीकन अमेरिकी बलों को लगातार उसकी स्थिति की जानकारी देता रहा, भले ही ईरानी बल उसके करीब पहुंचते रहे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्थिति को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि अधिकारी का शिकार किया जा रहा था… और हर घंटे खतरा बढ़ता जा रहा था। घायल होने के बावजूद वह गिरफ्तारी से बचता रहा, जिससे बचाव दल को महत्वपूर्ण समय मिला।
गोलीबारी और छल के बीच साहसी बचाव
यह बचाव अभियान हाल के अमेरिकी सैन्य इतिहास के सबसे जटिल अभियानों में से एक बताया गया है। इसमें सैकड़ों कर्मी शामिल थे, जिनमें स्पेशल ऑपरेशन फोर्स और खुफिया टीमें भी थीं। सीआईए द्वारा एक भ्रामक रणनीति (डिसेप्शन कैंपेन) अपनाई गई, ताकि ईरानी बलों को असली बचाव योजना के बारे में भ्रमित किया जा सके। अमेरिकी वायुसेना के कई विमान तैनात किए गए, ताकि पूरे हवाई क्षेत्र को सुरक्षित किया जा सके। हालांकि, यह मिशन पूरी तरह आसान नहीं था। अमेरिकी अधिकारियों ने स्वीकार किया कि दो स्पेशल ऑपरेशन विमान तकनीकी खराबी के कारण जमीन पर ही नष्ट कर दिए गए, ताकि वे ईरान के हाथ न लग सकें। वहीं ईरान ने दावा किया कि उसने कई अमेरिकी विमानों को मार गिराया और बचाव अभियान को विफल बताया लेकिन वाशिंगटन ने इन दावों का खंडन किया।
सुरक्षित वापसी
खतरों के बावजूद यह ऑपरेशन बिना अमेरिकी के हताहत हुए बिना पूरा हुआ। ट्रंप ने पुष्टि की कि अधिकारी पूरी तरह सुरक्षित है। उन्होंने यह भी बताया कि गिराए गए विमान के एक अन्य क्रू सदस्य को एक दिन पहले ही बचा लिया गया था।




