
ईरान ने देश पर हुए अमेरिकी-इजराइली हमले के जवाब में पूरे मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए, जिनमें दूतावासों को निशाना बनाया गया, अमेरिकी सैनिक मारे गए और कई सैन्य अड्डों तथा वायु रक्षा ढांचे को नुकसान पहुंचा। कम से कम 17 अमेरिकी ठिकानों और अन्य प्रतिष्ठानों को ईरानी हमलों से नुकसान पहुंचा है। इनमें से कई स्थानों पर युद्ध शुरू होने के बाद एक से अधिक बार हमले हुए हैं। यह विश्लेषण उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाणिज्यिक सैटेलाइट तस्वीरों, सत्यापित सोशल मीडिया वीडियो और अमेरिकी अधिकारियों तथा ईरानी सरकारी मीडिया के बयानों पर आधारित है। अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार जवाबी हमलों की तीव्रता से संकेत मिलता है कि ईरान युद्ध के लिए उतना अधिक तैयार था, जितना ट्रंप प्रशासन के कई लोगों ने अनुमान नहीं लगाया था।

ईरान ने पूरे क्षेत्र में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के सैन्य ठिकानों पर हजारों मिसाइलें और ड्रोन दागे हैं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार अमेरिका और उसके सहयोगियों ने इनमें से अधिकांश को रोक लिया, लेकिन कम से कम 11 अमेरिकी सैन्य अड्डों या प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचा। ये क्षेत्र में मौजूद ऐसे ठिकानों का लगभग आधा हिस्सा है। 28 फरवरी को संघर्ष के पहले दिन ईरान ने कई अमेरिकी सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाया, जिनमें प्रिंस सुल्तान एयर बेस, अली अल सलाम एयर बेस और अल उअैद एयर बेस शामिल हैं। यह मध्य पूर्व में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा है। सैटेलाइट तस्वीरों में कई स्थानों पर इमारतों और संचार ढांचे को भारी नुकसान दिखाई देता है।



