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न फ्रूट कैंडी में फल और न चाकलेट में कोको

भामक लेबल पर एफएसएसएआई का कई कंपनियों को नोटिस

जिस क्रीम बन पर बड़े-बड़े अक्षरों में 100% प्राकृतिक लिखा हो, उसमें प्रिजर्वेटिव मौजूद हो सकते हैं। प्रीमियम चॉकलेट के नाम से बेचे जाने वाले उत्पाद में कोकोआ बटर की जगह हाइड्रोजेनेटेड वनस्पति वसा का इस्तेमाल हो सकता है। वहीं, फलों के स्वाद वाली कैंडी ऐसी भी हो सकती है जिसमें फल का अंश तक न हो। भ्रामक खाद्य लेबलों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने लोटे इंडिया कॉरपोरेशन प्राइवेट लिमिटेड, फर्न्स एन पीटल्स प्राइवेट लिमिटेड और कुबेरा फूड्स को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। एफएसएसएआई का आरोप है कि इन कंपनियों के कई उत्पादों के पैकेट पर किए गए दावे उपभोक्ताओं को उनकी सामग्री और पोषण संबंधी जानकारी के बारे में गुमराह कर सकते हैं। प्राधिकरण ने कंपनियों से सात दिनों के भीतर यह बताने को कहा है कि उनके खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत कार्रवाई क्यों न की जाए।

दिल्ली के एम्स की आहार विशेषज्ञ मोनीता गेहलोत ने कहा कि खाद्य उत्पादों पर दिए गए लेबल उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण सूचना का स्रोत होते हैं और उन्हें सही खान-पान संबंधी निर्णय लेने में मदद करते हैं। उन्होंने कहा कि पैकेट के सामने दी गई जानकारी, पीछे दिए गए विस्तृत विवरण से मेल खानी चाहिए। उपभोक्ताओं को कोई भी खाद्य पदार्थ खरीदने से पहले उसकी सामग्री, पोषण संबंधी जानकारी, एलर्जी संबंधी चेतावनी और अन्य अनिवार्य जानकारियां अवश्य पढ़नी चाहिए।

कुबेरा फूड्स पर आरोप है कि उसने अपने सॉफ्ट एंड फ्रेश क्रीम बन पाइनएप्पल को 100% प्राकृतिक तथा कोई प्रिजर्वेटिव, रंग या फ्लेवर नहीं जैसे दावों के साथ बेचा, जबकि उत्पाद के लेबल पर स्वयं प्रिजर्वेटिव, सिंथेटिक रंग और अतिरिक्त फ्लेवरिंग पदार्थों का उल्लेख किया गया था। एफएसएसएआई ने शुद्ध, ताजा और प्राकृतिक जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई है। फर्न्स एन पीटल्स को उसके रोस्टेड आलमंड चॉकलेट के लिए नोटिस जारी किया गया है। इसे प्रीमियम चॉकलेट के रूप में प्रचारित किया गया। एफएसएसएआई का आरोप है कि इस उत्पाद में कोकोआ बटर की जगह हाइड्रोजेनेटेड वनस्पति वसा का इस्तेमाल किया गया, अनिवार्य जानकारी नहीं दी गईं और बादाम की मात्रा का भी खुलासा नहीं किया गया।

लोटे इंडिया को कई उत्पादों को लेकर नोटिस मिला है। एफएसएसएआई के अनुसार कंपनी ने चोको पाई के कुछ वैरिएंट पर 100% शाकाहारी होने का भ्रामक दावा किया। पेपेरो बिस्किट स्टिक्स पर पोषण संबंधी अनिवार्य जानकारी नहीं दी और फ्रूट्ज एक्लेयर्स को फलों के स्वाद वाली कैंडी के रूप में बेचा, जबकि उनमें फल का कोई अंश नहीं था। इसके अलावा, प्राधिकरण ने कुछ उत्पादों पर पुराने प्री-प्रिंटेड लेबल के इस्तेमाल और कुछ लॉलीपॉप में विटामिन की निर्धारित मात्रा से जुड़े मानकों के उल्लंघन पर भी आपत्ति दर्ज की है।

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