
लियोनेल मेसी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उन्हें आधुनिक फुटबॉल का महानतम खिलाड़ी क्यों माना जाता है। अर्जेंटीना के कप्तान ने विश्व कप में अपने रिकॉर्ड छठे अभियान के दौरान कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल करते हुए अपनी टीम को राउंड ऑफ-32 में पहुंचा दिया।
सोमवार को ग्रुप-जे के मुकाबले में ऑस्ट्रिया के खिलाफ मेसी ने अपनी टीम का पहला गोल दागकर विश्व कप इतिहास में सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी का रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया।
इसके बाद उन्होंने मैच के अंतिम क्षणों में एक और गोल किया और छह विश्व कप टूर्नामेंटों में अपने कुल गोलों की संख्या 18 तक पहुंचा दी। टेक्सास के अर्लिंग्टन स्थित डलास स्टेडियम में मौजूद हजारों अर्जेंटीनी प्रशंसकों के बीच इस उपलब्धि का जोरदार स्वागत हुआ।
‘मेसी अब पहले जितना नहीं दौड़ते’
ऑस्ट्रिया के मुख्य कोच राल्फ रांगनिक ने मैच से पहले मेसी की खेल शैली का विश्लेषण करते हुए कहा था कि अब लगभग 39 वर्षीय अर्जेंटीनी स्टार पहले जितनी दौड़-भाग नहीं करते।
रांगनिक ने कहा, “मेसी अब पहले जितना मैदान नहीं नापते। वह अक्सर एक ओर खड़े रहते हैं और कई बार ऑफसाइड पोजीशन के आसपास भी दिखाई देते हैं।”
उन्होंने कहा, “इसका मतलब यह नहीं कि अर्जेंटीना एक खिलाड़ी कम लेकर खेलती है, बल्कि केवल इतना है कि काउंटर-प्रेसिंग में एक खिलाड़ी कम काम करता है।”
“लेकिन यही चीज उन्हें सबसे खतरनाक बनाती है, क्योंकि वह अचानक खाली जगह में पहुंच जाते हैं। हमें इसके लिए पूरी तरह तैयार रहना होगा।”
फिर दिखा मेसी का जादू
रांगनिक की रणनीति मैदान पर ज्यादा देर नहीं टिक सकी।
करीब 70 हजार दर्शकों से खचाखच भरे स्टेडियम में अर्जेंटीना के प्रशंसकों का दबदबा था।
मेसी ने शुरुआती पेनाल्टी जरूर गंवा दी, जिससे वह विश्व कप में सबसे ज्यादा गोल करने के मामले में मिरोस्लाव क्लोज़े से आगे निकलने का पहला मौका खो बैठे।
मैच के बाद मेसी ने स्वीकार किया कि वह खुद से “बेहद नाराज” थे।
इसके बाद उन्होंने दो बार गोल करने की कोशिश की, लेकिन ऑस्ट्रिया के कप्तान डेविड अलाबा ने शानदार बचाव किया।
आखिरकार 38वें मिनट में फाकुंडो मेडिना के शानदार पास पर मेसी ने अपना जादुई बायां पैर चलाते हुए गेंद को गोल में पहुंचा दिया।
ठीक वैसा ही हुआ, जिसकी चेतावनी रांगनिक ने दी थी। मेसी चुपचाप खाली जगह में पहुंचे और बिना किसी दबाव के शानदार फिनिश किया।
यह उनका विश्व कप का 17वां गोल था।
इसके बाद इंजरी टाइम के पांचवें मिनट में उन्होंने एक और गोल कर अपना कुल आंकड़ा 18 तक पहुंचा दिया। कई रक्षकों के बीच भी मेसी ने शानदार तरीके से गेंद को नेट में पहुंचा दिया।
रिकॉर्ड छठा विश्व कप खेल रहे मेसी 95वें मिनट तक उसी ऊर्जा के साथ खेलते नजर आए।
इस विश्व कप में अब तक उनके पांच गोल हो चुके हैं। इससे पहले उन्होंने अल्जीरिया के खिलाफ 3-0 की जीत में हैट्रिक लगाई थी, जो उनके विश्व कप करियर की पहली हैट्रिक भी थी।
मेसी के लिए बनी पूरी टीम
अर्जेंटीना के कोच लियोनेल स्कालोनी, जो 2006 विश्व कप में मेसी के साथी खिलाड़ी रहे थे, ने पूरी टीम की रणनीति ही अपने कप्तान के इर्द-गिर्द तैयार की है।
टीम के अन्य खिलाड़ी ज्यादा दौड़-भाग करते हैं ताकि मेसी अपनी ऊर्जा निर्णायक मौकों के लिए बचाकर रख सकें।
हालांकि स्कालोनी का कहना है कि मेसी पूरी तरह रक्षात्मक जिम्मेदारियों से मुक्त नहीं हैं।
उन्होंने कहा, “आज जब हमारी टीम गेंद के बिना संघर्ष कर रही थी, तब भी मेसी ने भरपूर मेहनत की। उनका समर्पण उनके व्यक्तित्व को दर्शाता है।”
पांच बार खुद को बदला, फिर भी सबसे आगे
मेसी की चर्चित जीवनी लिख चुके स्पेनिश पत्रकार गिलेम बालागे का मानना है कि आज के मेसी शुरुआती दौर के बार्सिलोना वाले मेसी से बिल्कुल अलग खिलाड़ी हैं।
बालागे के अनुसार, “मेसी ने खुद को कम से कम पांच बार बदला है, ताकि वह अर्जेंटीना और इंटर मियामी के लिए आज के खिलाड़ी बन सकें।”
उन्होंने लिखा, “उन्होंने अपने खेल को इस तरह ढाला कि वह लगातार बदलते फुटबॉल से हमेशा एक कदम आगे बने रहें।”
बालागे ने मेसी के बचपन के आदर्श पाब्लो ऐमार का एक मशहूर कथन भी याद दिलाया—
“मेसी का हर नया संस्करण, पिछले मेसी से बेहतर होता है।”
अब मेसी पहले की तुलना में कम दौड़ते हैं, लेकिन खेल को सबसे पहले पढ़ लेते हैं।
बालागे लिखते हैं, “कभी आलोचक उनकी कम दौड़ने की आदत को कमजोरी बताते थे। आज वही चीज उनकी सबसे बड़ी महारत मानी जाती है।”
यही वजह है कि 39 वर्ष की उम्र के करीब पहुंचने के बावजूद लियोनेल मेसी आज भी विश्व फुटबॉल के सबसे निर्णायक खिलाड़ियों में शुमार हैं।




