
दो सबसे चर्चित स्वास्थ्य रुझान — दीर्घायु (Longevity) चिकित्सा और वजन घटाने वाली दवाएं — अब एक-दूसरे से जुड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं। कई वर्षों से बायोहैकर्स और उम्र बढ़ने पर शोध करने वाले वैज्ञानिकों के बीच यह चर्चा रही है कि GLP-1 श्रेणी की दवाएं, जैसे ओज़ेम्पिक (Ozempic) और ज़ेपबाउंड (Zepbound), न केवल वजन कम करने में मदद करती हैं बल्कि लोगों की उम्र भी बढ़ा सकती हैं। ऑनलाइन फार्मेसियां तो इन दवाओं के कंपाउंडेड (संशोधित) संस्करणों का प्रचार इस दावे के साथ भी कर रही हैं कि वे लोगों के हेल्थ स्पैन (स्वस्थ जीवन अवधि) को बढ़ा सकती हैं। हालांकि, अब तक इस सिद्धांत पर वैज्ञानिक शोध बहुत सीमित रहा है। पिछले महीने प्रकाशित एक शुरुआती अध्ययन ने पहली बार इस पर गंभीरता से परीक्षण किया। अध्ययन में पाया गया कि एचआईवी (HIV) और लाइपोहाइपरट्रॉफी (त्वचा के नीचे असामान्य वसा जमा होने की स्थिति) से पीड़ित लोगों में आठ महीने तक सेमाग्लूटाइड (Semaglutide)—जो ओज़ेम्पिक की सक्रिय दवा है—का सेवन करने से उनके जैविक उम्र बढ़ने (Biological Aging) की रफ्तार धीमी होती दिखाई दी। इसका आकलन रक्त परीक्षणों के जरिए उम्र से जुड़े जैविक संकेतकों (Biomarkers) को मापकर किया गया। शोध का नेतृत्व करने वाले डॉ. माइकल कॉर्ली, जो यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, सैन डिएगो के स्टीन इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च ऑन एजिंग में मेडिसिन के एसोसिएट प्रोफेसर हैं, ने बताया कि एचआईवी से संक्रमित लोगों में उम्र बढ़ने की प्रक्रिया सामान्य लोगों की तुलना में तेज होती है। इसलिए इस आबादी पर उम्र संबंधी शोध करना अधिक उपयोगी माना जाता है। हालांकि यह अध्ययन प्रारंभिक था, लेकिन डॉ. कॉर्ली के अनुसार, “इससे हमें यह समझने का मौका मिला कि क्या वास्तव में इस विषय पर हो रही चर्चाओं के पीछे कोई वैज्ञानिक संकेत मौजूद है।”
GLP-1 दवाओं को लेकर इतना उत्साह क्यों?
इस उत्साह के पीछे कई वैज्ञानिक कारण हैं।
सबसे पहले, अनेक शोध पहले ही साबित कर चुके हैं कि GLP-1 दवाएं इंसुलिन और रक्त शर्करा (ब्लड शुगर) को नियंत्रित करके शरीर की मेटाबॉलिक सेहत में सुधार करती हैं और वजन घटाने में मदद करती हैं। इसके अलावा, कई अध्ययनों में यह भी सामने आया है कि ये दवाएं हृदय, लीवर और किडनी के स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक हैं।
चूंकि मधुमेह और हृदय रोग दुनिया में मृत्यु के सबसे बड़े कारणों में शामिल हैं, इसलिए केवल इन बीमारियों से बचाव के आधार पर भी GLP-1 दवाओं को दीर्घायु बढ़ाने वाली दवाएं कहा जा सकता है।
लॉस एंजिलिस स्थित सेडर्स-सिनाई मेडिकल सेंटर के डायबिटीज एंड एजिंग सेंटर के निदेशक डॉ. निकोलस मूसी का कहना है, “GLP-1 एगोनिस्ट उन बीमारियों की संभावना कम करते हैं जो उम्र बढ़ने से जुड़ी होती हैं और जीवनकाल घटाने के लिए जिम्मेदार होती हैं। इसलिए यह मानना स्वाभाविक है कि वे जीवनकाल बढ़ाने और स्वस्थ दीर्घायु में भी मदद कर सकते हैं।”
कोशिकाओं पर भी पड़ता है असर
विशेषज्ञों का मानना है कि GLP-1 दवाएं केवल वजन कम नहीं करतीं, बल्कि शरीर की कोशिकाओं के काम करने के तरीके को भी प्रभावित करती हैं।
मेटाबॉलिक स्वास्थ्य और उम्र बढ़ने का गहरा संबंध है। इसलिए जो दवाएं शरीर के मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करती हैं, वे उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को भी बदल सकती हैं।
डॉ. मूसी बताते हैं, “डायबिटीज की दवाएं जिन जैविक मार्गों (Pathways) को नियंत्रित करती हैं, वही उम्र बढ़ने और दीर्घायु को भी नियंत्रित करते हैं।”
इसी कारण मेटफॉर्मिन और SGLT2 इनहिबिटर्स जैसी अन्य मधुमेह की दवाओं पर भी दीर्घायु के संदर्भ में शोध जारी है, हालांकि अब तक उनके परिणाम मिले-जुले रहे हैं।
सूजन कम करने की क्षमता
GLP-1 दवाओं का सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव सूजन (Inflammation) कम करना माना जा रहा है।
यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास मेडिकल ब्रांच के प्रोफेसर डॉ. थॉमस ब्लैकवेल के अनुसार, “हमें पता है कि इन दवाओं का सूजन कम करने पर उल्लेखनीय प्रभाव पड़ता है, और यह भी अच्छी तरह स्थापित है कि शरीर में लगातार रहने वाली सूजन उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को तेज करती है।”
लेकिन अभी कई सवाल बाकी हैं
इन सभी सकारात्मक संकेतों के बावजूद वैज्ञानिक एक बड़ी चेतावनी भी देते हैं।
अब तक लगभग कोई ठोस प्रमाण नहीं है कि ये दवाएं उन लोगों के लिए भी लाभकारी होंगी जो पहले से पूरी तरह मेटाबॉलिक रूप से स्वस्थ हैं।
यहां तक कि स्वस्थ चूहों पर भी यह साबित नहीं हुआ है कि GLP-1 दवाएं जीवनकाल बढ़ाती हैं।
यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन के पैथोलॉजी प्रोफेसर डॉ. रिचर्ड मिलर, जो चूहों में संभावित एंटी-एजिंग दवाओं का परीक्षण करते हैं, बताते हैं कि ऐसा मुख्य रूप से तकनीकी कारणों से है। वर्तमान GLP-1 दवाएं या तो चूहों पर इंसानों जैसी प्रभावी नहीं होतीं, या उन्हें लंबे समय तक हर सप्ताह इंजेक्शन के रूप में देना व्यावहारिक नहीं है।
संभावित जोखिम भी मौजूद
इन दवाओं से जुड़े कुछ जोखिम भी हैं, जो विशेष रूप से बुजुर्गों के लिए चिंता का विषय हो सकते हैं।
सबसे महत्वपूर्ण समस्या मांसपेशियों का कम होना (Muscle Loss) है। वृद्ध लोगों में मांसपेशियों की कमी कमजोरी, गिरने और शारीरिक अक्षमता का खतरा बढ़ा सकती है।
इसके अलावा, बहुत तेजी से वजन कम होने पर हड्डियों का घनत्व (Bone Density) भी घट सकता है, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस का जोखिम बढ़ जाता है।
नए क्लीनिकल ट्रायल शुरू
अब कई नए क्लीनिकल ट्रायल शुरू हो रहे हैं, जिनमें GLP-1 दवाओं का असर उम्र बढ़ने से जुड़े विभिन्न जैविक संकेतकों—जैसे सूजन का स्तर, जैविक आयु (Biological Age)—और शारीरिक क्षमताओं, जैसे ताकत और चलने की गति, पर जांचा जाएगा।
हालांकि इनमें शामिल प्रतिभागियों को वजन घटाने वाली दवाओं के लिए पहले से निर्धारित चिकित्सकीय मानदंड पूरे करने होंगे, जैसे बीएमआई (BMI) 27 या उससे अधिक होना और साथ में उच्च रक्तचाप जैसी कोई संबंधित बीमारी होना।
डॉ. ब्लैकवेल का कहना है कि ऐसे मानदंड अमेरिका के बड़ी संख्या में लोगों पर लागू होते हैं।
फिलहाल विशेषज्ञ क्या सलाह देते हैं?
फिलहाल अधिकांश विशेषज्ञ केवल उम्र बढ़ाने के उद्देश्य से GLP-1 दवाओं का ऑफ-लेबल उपयोग करने की सलाह नहीं देते।
डॉ. मूसी कहते हैं, “जो लोग अन्यथा पूरी तरह स्वस्थ हैं, उनके लिए इस समय इन दवाओं का उपयोग करना जल्दबाजी होगी, क्योंकि प्री-क्लीनिकल और क्लीनिकल दोनों स्तरों पर इसे उचित ठहराने वाले पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद नहीं हैं।”
दिलचस्प बात यह है कि डॉ. थॉमस ब्लैकवेल स्वयं पिछले एक वर्ष से टिरज़ेपाटाइड (Tirzepatide)—जो ज़ेपबाउंड की दवा है—का उपयोग उम्र बढ़ने की गति धीमी करने के उद्देश्य से कर रहे हैं।
लेकिन वे साफ कहते हैं, “क्या मुझे पूरा विश्वास है कि मैं सही कर रहा हूं? नहीं। क्या मैं अपने मरीजों को यही सलाह देता हूं? बिल्कुल नहीं।”
उन्होंने स्पष्ट किया, “यह पूरी तरह मेरा व्यक्तिगत फैसला है।”




