
हरियाणा सरकार ने सरस्वती नदी के संरक्षण, पुनरुद्धार और समग्र विकास को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड की बैठक में सरस्वती परियोजना को गति देने, पिहोवा को धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने तथा नदी में स्थायी जल प्रवाह सुनिश्चित करने के लिए आईआईटी रुड़की से वैज्ञानिक अध्ययन कराने का निर्णय लिया गया।
बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरस्वती नदी केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन सभ्यता और संस्कृति की महत्वपूर्ण धरोहर है। उन्होंने अधिकारियों को आदिबद्री सहित परियोजना से जुड़े सभी कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरस्वती पुनर्जीवन परियोजना से पेयजल और सिंचाई के स्रोत मजबूत होंगे, भूजल स्तर में सुधार आएगा और पिहोवा क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि पिहोवा में 350 एकड़ क्षेत्र में सरस्वती सरोवर विकसित किया जा रहा है। इसके मुख्य जलाशय के लिए अब तक लगभग 10 लाख क्यूसेक मिट्टी की खुदाई पूरी हो चुकी है। मुख्यमंत्री ने बैराज निर्माण कार्य की समीक्षा करते हुए सिंचाई विभाग को इसे बिना किसी देरी के पूरा करने के निर्देश दिए और कहा कि परियोजना की समयसीमा तथा गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
बैठक में पिहोवा के समग्र विकास पर भी चर्चा हुई। प्राची सरस्वती सहायक नदी के सौंदर्यीकरण, घाटों और सीढ़ियों के निर्माण, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए शेड तथा अन्य पर्यटन सुविधाओं के विकास की करीब 56 करोड़ रुपये की परियोजना पर भी विचार किया गया। अधिकारियों ने बताया कि नदी तट पर आधुनिक घाट, नए पुल, प्राचीन मंदिरों का जीर्णोद्धार, तालाबों का संरक्षण और नदी तट को विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है। पिहोवा में संग्रहालय और व्याख्या केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव भी विचाराधीन है।
मुख्यमंत्री ने सरस्वती नदी के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के व्यापक प्रचार-प्रसार पर भी जोर दिया। उन्होंने नदी क्षेत्र के आसपास 40 से 50 प्रमुख स्थानों पर बड़े साइनेज बोर्ड लगाने के निर्देश दिए, ताकि लोगों को सरस्वती के इतिहास और महत्व की जानकारी मिल सके तथा संरक्षण अभियान में जनभागीदारी बढ़े।
नदी को प्रदूषणमुक्त बनाए रखने के लिए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सरस्वती क्षेत्र के सभी लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम पूरी तरह कार्यशील रहें। उन्होंने कहा कि आसपास के गांवों का अनुपचारित सीवेज किसी भी स्थिति में नदी में नहीं गिरना चाहिए। इसके लिए नगर निगम, पंचायती राज और सिंचाई विभाग के समन्वय से सभी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) पूरी क्षमता से संचालित करने और नदी के जल की गुणवत्ता की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय टोंस बेसिन और सरस्वती बेसिन के बीच जल संयोजन तथा भूजल प्रबंधन के लिए आईआईटी रुड़की से वैज्ञानिक परामर्श लेने का रहा। इसके तहत आईआईटी रुड़की विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट तैयार करेगी, जिसमें यह अध्ययन किया जाएगा कि टोंस नदी और बरसाती नालों के पानी को सरस्वती नदी तक कैसे पहुंचाया जा सकता है। साथ ही विभिन्न जल स्रोतों की मात्रा और गुणवत्ता का आकलन कर भूजल पुनर्भरण और दीर्घकालिक जल सुरक्षा के लिए वैज्ञानिक उपाय सुझाए जाएंगे। अधिकारियों के अनुसार, इससे सरस्वती पुनरुद्धार परियोजना को वैज्ञानिक आधार मिलेगा और नदी में निरंतर जल प्रवाह के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों के भूजल स्तर में भी सुधार होगा।
बैठक में मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर, मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल, ए.के. सिंह, अनुराग अग्रवाल, जनस्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी विभाग के प्रधान सचिव पंकज यादव, कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल, सूचना, जनसंपर्क एवं भाषा विभाग के महानिदेशक के. मकरंद पांडुरंग, हरियाणा सरस्वती धरोहर विकास बोर्ड के सीईओ कुमार सुप्रवीण सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।




