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सीआईए निदेशक की गुपचुप मास्को यात्रा ने खड़े किए सवाल

बड़बोले ट्रंप ने अमेरिका की साख हर मोर्चे पर खत्म कर दी

जिस ट्रंप ने चुनाव जीतते ही दावा किया था कि वह रूसयूक्रेन युद्ध को चुटकियों में खत्म करा देंगे, आज वही युद्ध चार साल से ज्यादा समय बाद भी जारी है। शांति वार्ता ठप पड़ी है और हालात ऐसे हैं कि परमाणु टकराव की आशंका तक चर्चा में गई है। इसी बीच अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के निदेशक जॉन रैटक्लिफ चुपचाप मॉस्को पहुंचते हैं और रूसी खुफिया अधिकारियों से मुलाकात करते हैं। क्रेमलिन के मुताबिक पुतिन को बातचीत की जानकारी भी दी गई।

यह यात्रा अपने आप में बहुत कुछ कहती है।

जिस अमेरिका का राष्ट्रपति दुनिया को धमकाकर अपनी शर्तें मनवाने का दावा करता था, उसके सबसे बड़े खुफिया अधिकारी को अब मॉस्को जाकर रूस से बात करनी पड़ रही है। अगर अमेरिका के पास सचमुच वही पुरानी धौंस और दबदबा बचा है, तो फिर इतनी गोपनीय बातचीत की जरूरत क्यों पड़ रही है?

ईरान में अमेरिका की सैन्य ताकत के इस्तेमाल के बाद भी वह निर्णायक राजनीतिक परिणाम हासिल नहीं कर पाया और अब रूस के सामने भी वही संकट खड़ा हैधमकी देने की क्षमता और अपनी धमकी को परिणाम में बदलने की क्षमता, दोनों अलगअलग चीजें हैं।

ट्रंप ने दुनिया को यह विश्वास दिलाने की कोशिश की थी कि अमेरिका उनके नेतृत्व में पहले से ज्यादा ताकतवर हो गया है। लेकिन नतीजे इसके उलट दिखाई दे रहे हैं। मित्र असमंजस में हैं, विरोधी बेखौफ हैं और जिन युद्धों को ट्रंप कुछ दिनों या हफ्तों में खत्म कराने का दावा करते थे, वे और जटिल होते जा रहे हैं।

यूक्रेन इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। अमेरिका और यूरोप की भारी सहायता के बावजूद रूस अब भी युद्ध के मैदान में मौजूद है और कई क्षेत्रों में बढ़त बनाए हुए है। दूसरी ओर यूक्रेन तबाही झेल रहा है। लाखों लोगों का जीवन बर्बाद हुआ, शहर तबाह हुए और देश की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हुआ।

और इस पूरी त्रासदी के बीच ट्रंप का वह दावा भी कहीं दिखाई नहीं देता कि मैं अकेला ही इस युद्ध को खत्म कर दूंगा।

असल संकट केवल यूक्रेन या ईरान का नहीं है। संकट अमेरिकी विश्वसनीयता का है।

ट्रंप ने अमेरिका की विदेश नीति को इतनी बार धमकी, पलटी और अतिशयोक्ति का खेल बना दिया है कि अब दुनिया यह पूछने लगी है कि अमेरिकी राष्ट्रपति की अगली धमकी को गंभीरता से लिया भी जाए या नहीं।

जिस देश की सबसे बड़ी ताकत उसकी सैन्य शक्ति से ज्यादा उसकी धमकी की विश्वसनीयता हुआ करती थी, ट्रंप ने उसी विश्वसनीयता को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है।

अब मॉस्को में CIA प्रमुख की बंद कमरे में होने वाली बातचीत दुनिया को शायद यही संदेश दे रही है
अमेरिका के पास ताकत अभी भी है, लेकिन ट्रंप के अमेरिका की धौंस में पहले जैसी धार नहीं बची।

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